स्वर व तत्त्व से अनेकों लाभ…….

स्वर व तत्त्व का वर्णन अनेक धर्म ग्रंथों में है और बहुत से योगी पुरुष इसे जानते है
किन्तु वे भी इनका सही से उपयोग बता पाने में असमर्थ रहे।
वर्तमान में कुछेक स्वर शास्त्री स्वर की गहराई को समझ पाये है परन्तु उनका भी तत्त्वों को पूर्ण रूप से समझ पाना अभी बाकि है।

वास्तव में स्वर तत्त्वों का बाहरी आवरण है ,वास्तविक खेल तत्वों में समाहित है
इसलिए तत्त्वों को जाने और समझें। केवल तत्त्वों की पहचान कर लेना पर्याप्त नहीं है ,
बल्कि इनसे प्रत्यक्ष आर्थिक ,सामाजिक ,आध्यात्मिक आदि लाभ उठाना उचित है।
इस स्वर-शास्त्र को अधिक सीखना चाहिए।

जो मनुष्य इस विद्या का जितना अधिक प्रयोग करता है उसकी शारीरिक, आर्थिक, सामाजिक व आध्यात्मिक उन्नति उतनी ही तेजी से होती है |
वेद शास्त्र सर्वदा सत्य हैं,
इसकी प्रमाणिकता इनके अनुसार आचरण करके ही प्राप्त किया जा सकता है |

.…..TATTVA-VETTA PARAMHANSA JI

 

WhatsApp-

https://wa.me/message/PE47B6RMJ2CPP1

For online course details-                                                 

https://rzp.io/l/Swarvigyan

For daily detailed prediction and graph-

https://rzp.io/l/5elements

YouTube:-

https://youtube.com/c/TattvavettaParamhansaji1

My books on Amazon- 

https://www.amazon.com/-/e/B088FG3992

My book “Dhan Sagar” Hindi on Google book play store-

https://play.google.com/store/books/details?id=UrbuDwAAQBAJ

Email :- Tattwavetta@gmail.com

PayPal

https://paypal.me/tattvavetta