माइक्रो फाइनेंस कंपनी की मनमानी: रेजिडेंस रूम से चल रहा खेल, आदिवासी ग्रामीणों से बदसलूकी का आरोप
जुन्नारदेव अंचल में माइक्रो फाइनेंस कंपनी की मनमानी: रेजिडेंस रूम से चल रहा खेल, आदिवासी ग्रामीणों से बदसलूकी का आरोप
संतोष आमरे । कॉर्न सिटी , जुन्नारदेव (छिंदवाड़ा)
: छिंदवाड़ा जिले के जुन्नारदेव विधानसभा और ब्लॉक अंतर्गत आने वाले ग्रामीण व आदिवासी अंचलों में गरीब परिवारों को आर्थिक मदद का झांसा देकर शुरू हुई माइक्रो फाइनेंस कंपनियां अब खुलेआम शोषण का जरिया बन चुकी हैं। ताजा मामला जुन्नारदेव क्षेत्र का है, जहां ‘स्पंदन स्फूर्ति फाइनेंशियल सर्विसेज’ (स्वादना माइक्रो फाइनेंस) कंपनी द्वारा नियम-कानूनों को ताक पर रखकर भोले-भाले ग्रामीणों को गुमराह करने और उनके साथ लूटपाट मचाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
रेजिडेंस रूम में अवैध ऑफिस, न बोर्ड न पहचान
क्षेत्र से मिली जानकारी के अनुसार, इस फाइनेंस कंपनी द्वारा किसी व्यावसायिक परिसर (Commercial Complex) के बजाय जुन्नारदेव के एक आवासीय मकान (रेजिडेंस रूम) को गुपचुप तरीके से ऑफिस बना दिया गया है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि न तो बाहर कोई उचित बोर्ड लगाया गया है और न ही काम करने के तरीकों में कोई पारदर्शिता है। आवासीय क्षेत्र में इस तरह की संदिग्ध और बिना अनुमति वाली वित्तीय गतिविधियां स्थानीय प्रशासन और नगर पालिका/पंचायत के नियमों का सरेआम उल्लंघन हैं।
आदिवासी क्षेत्र होने का उठाया जा रहा फायदा
जुन्नारदेव और इसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्र मुख्य रूप से आदिवासी बाहुल्य हैं। आरोप है कि कंपनी के कर्मचारी और अधिकारी ग्रामीणों की सादगी, ईमानदारी और कम पढ़े-लिखे होने का पूरा फायदा उठा रहे हैं। लोन देने के नाम पर मोटी फाइलिंग फीस, छिपे हुए चार्ज (Hidden Charges) और भारी-भरकम ब्याज थोपा जा रहा है। सीधे-साधे ग्रामीणों को कागजी कार्रवाई और नियमों के जाल में फंसाकर गुमराह किया जा रहा है।
“बीच मैनेजर की बदतमीजी से उपभोक्ता परेशान”
पीड़ित उपभोक्ताओं ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जब भी कोई ग्रामीण लोन की किस्तों, ब्याज दर या पासबुक एंट्री के नियमों के बारे में पूछताछ करने ऑफिस पहुंचता है, तो वहां मौजूद ब्रांच मैनेजर (बीच मैनेजर) बेहद अभद्र और बदतमीजी से बात करता है। किश्त वसूलने के नाम पर डराना-धमकाना और महिलाओं व बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार करना यहाँ के स्टाफ की रोज की आदत बन चुका है।
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कोई भी माइक्रो फाइनेंस कंपनी निम्नलिखित कार्य नहीं कर सकती, जो जुन्नारदेव के इस दफ्तर में धड़ल्ले से हो रहे हैं:
पारदर्शिता का अभाव: लोन देने से पहले ग्राहक को ‘लोन कार्ड’ और सभी खर्चों की लिखित जानकारी (Fair Practices Code) देना अनिवार्य है, जिसे यहाँ छिपाया जा रहा है।
अवैध दफ्तर: आवासीय क्षेत्र (Residential Area) में बिना कमर्शियल डायवर्शन और अनुमति के वित्तीय संस्था का दफ्तर चलाना नियमों के विरुद्ध है।
वसूली के कड़े और अभद्र नियम प्रतिबंधित: RBI के अनुसार, कोई भी कर्मचारी किसी भी ग्राहक से बदतमीजी, गाली-गलौज या मानसिक उत्पीड़न नहीं कर सकता। लोन रिकवरी के लिए केवल सुबह 9 से शाम 6 बजे तक का समय ही तय है।
प्रशासन और पुलिस से कार्रवाई की मांग
जुन्नारदेव क्षेत्र के जागरूक नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और पीड़ित ग्रामीणों ने स्थानीय पुलिस प्रशासन, एसडीएम (SDM) जुन्नारदेव और जिला कलेक्टर छिंदवाड़ा से इस फर्जीवाड़े और तानाशाही के खिलाफ तुरंत संज्ञान लेने की मांग की है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि यदि जल्द ही इस ‘स्वादना’ (स्पंदन) माइक्रो फाइनेंस कंपनी के दफ्तर की जांच कर इस पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो मजबूर होकर ग्रामीणों को उग्र आंदोलन का रास्ता चुनना पड़ेगा।
