आरटीआइ का उल्लंघन करने के मामले में यातायात प्रभारी पर 25 हजार का जुर्माना

राज्य सूचना आयुक्त ने जारी किया आदेश ….

Singrauli Traffic In-Charge Fined 25 Thousand For Violating RTI

सिंगरौली. आरटीआइ यानी सूचना अधिकार अधिनियम को नजरअंदाज करना यातायात प्रभारी पर भारी पड़ गया है। लॉकडाउन के दौरान कितने वाहनों पर चालानी कार्रवाई की गई है। इसकी जानकारी नहीं देने पर यातायात प्रभारी दीपेेंद्र सिंह कुशवाह पर 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है।

राज्य सूचना आयुक्त ने प्रभारी को जुर्माना की राशि आयोग में जमा करने को निर्देशित किया है। यातायात प्रभारी ने इस जानकारी से अज्ञानता जाहिर की है। हालांकि जुर्माने की राशि नकद या डीडी के रूप में जमा करने के लिए एक माह का वक्त दिया गया है। राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह द्वारा निर्धारित अवधि में यातायात प्रभारी की ओर से जुर्माने की राशि जमा नहीं कराई गई तो मध्यप्रदेश सूचना का अधिकार (फीस अथवा अपील) नियम 2005 के नियम 8 (6) के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।

यातायात प्रभारी सिंगरौली दीपेन्द्र सिंह कुशवाह की कार्यप्रणाली पर आयोग ने चिंता जताया है। प्रभारी द्वारा आरटीआइ से संबंधित रजिस्टर्ड डाक लगातार लौटाने के मामले में आयुक्त ने गंभीरता से लिया है। आरटीआइ के आवेदन को बिना किसी कारण अस्वीकार करने की स्थिति में प्रतिदिन 250 रुपए के मान से अधिकतम 25 हजार रुपए का जुर्माना यातायात प्रभारी को अधिरोपित किया गया है।

यह था पूरा मामला
अपीलार्थी अतुलेश कुमार द्विवेदी की ओर से लॉकडाउन के दौरान यानि 10 अप्रेल से 31 मई 2021 तक यातायात पुलिस की ओर से माजन मोड़ में चेक किए गए सभी वाहनों के संधारण रजिस्टर की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने की जानकारी चाही गई थी लेकिन लोक सूचना अधिकारी द्वारा भारतीय डाक से प्रेषित आरटीआइ आवदेन को लेने से इंकार कर दिया था। इसके बाद आवेदक की ओर से शिकायत आयोग में दर्ज कराई गई। आवेदन ने पहली बार आवेदन एक जून को आवेदन भेजा था। इसके बाद रजिस्टर्ड डाक से तीन बार आवेदन भेजा गया।

आयोग को नहीं दिया संतोषजनक जवाब
सुनवाई के दौरान आयोग ने यातायात प्रभारी दीपेन्द्र सिंह कुशवाह को पर्याप्त अवसर व समय दिया गया था। इसके बावजूद यातायात प्रभारी ने आयोग के समक्ष ऐसा कोई तथ्य या प्रमाण पेश नहीं किया। जिसमें यह माना गया हो कि अपीलार्थी को जानकारी प्रदान करने का कोई भी प्रयास तत्परता पूर्वक उनके द्वारा किया गया हो। चाही गई जानकारी पूरी तरह से सामान्य रूप से प्रदान की जा सकती थी। लेकिन यातायात प्रभारी ने आयोग के समक्ष खुद की लापरवाही को दर्शाया है। 2 अगस्त को सुनवाई में आयुक्त ने यातायात प्रभारी पर 25 हजार का जुर्माना लगाया। इससे पहले 16 जुलाई और 22 जुलाई को इस मामले में आयुक्त द्वारा सुनवाई की गई थी।