जनसुनवाई शुरू न होने से मुश्किल में फरियादी

प्रतिबंध के बावजूद कलेक्टर को शिकायतें सुनाने बेताब लोग,ग्रामीण इलाकों की समस्याएं अधिक

 

छिंदवाड़ा:- कोरोना संक्रमण के दौर के बाद जनजीवन सामान्य हुए ढाई माह बीत गए है लेकिन अभी तक कलेक्टर जनसुनवाई के आदेश न आने से फरियादी भटक रहे हैं। खासकर मंगलवार को पूरे दिन कलेक्ट्रेट परिसर में लोग भटकते नजर आए। उनकी बस एक ही मांग थी कि वे कलेक्टर को अपनी शिकायत सुनाना चाहते हैं लेकिन कोरोना गाइड लाइन के चलते ऐसा नहीं हो पाया।
कोरोना की दूसरी लहर के फरवरी-मार्च में दस्तक देने के बाद राज्य शासन द्वारा तत्काल कलेक्टर जनसुनवाई पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। उसके बाद विभागीय स्तर पर भी शिकायतों के निराकरण का सिलसिला बंद हो गया। जून में अनलॉक होने पर जिलेभर में जनजीवन सामान्य हुआ और जुलाई में स्थिति संभली। अगस्त में आवागमन भी शुरू हो गया। इस स्थिति में शहरी और ग्रामीण इलाकों के लोग अपने क्षेत्र की सड़क, नाली, पुल-पुलिया, अतिक्रमण, पेंशन समेत अन्य जनसमस्याओं को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचते हैं। जनसुनवाई न होने पर उन्हें यहां-वहां भटकना पड़ता है। उन्होंने इस समस्या पर कलेक्टर का ध्यान आकर्षित किया है।

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सुबह से शाम इंतजार..कैसे मिलेंगे कलेक्टर साहब
चांद के पास ग्राम तीतरी से आए ग्रामीणों का दल दिन भर कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास भटकता रहा। उनके गांव की सरकारी जमीन पर किसी व्यक्ति ने अतिक्रमण कर लिया है। जनसुनवाई न होने के बावजूद वे अपनी शिकायत कलेक्टर को सुनाने मध्यान्ह 4 बजे तक बैठे रहे। उनका कहना था कि जमीन पर अतिक्रमण से पूरा गांव परेशान हो रहा है। पहले शिकायत पर सुनवाई नहीं हुई, इसलिए केवल कलेक्टर ही उनकी शिकायत का समाधान कर सकते हैं।

बोदरी नाले की जमीन पर कब्जा, मुश्किल में भुजलिया उत्सव
लोनिया करबल में बोदरी नाला से लगी जमीन पर अतिक्रमण होने पर भुजलिया उत्सव मुश्किल में पड़ गया है। इसकी शिकायत लेकर स्थानीय तुलसीराम साहू कलेक्टर कार्यालय आए। उन्होंने बताया कि नाले के तट पर ही भुजलिया के अवसर पर मेले का आयोजन होता रहा है। पिछले कुछ सालों से भुजलिया मेला आयोजन स्थल की भूमि अतिक्रमण की चपेट में है । स्थानीय भूमि स्वामी द्वारा छोटे – छोटे आवासीय भू-खंड बिक्री कर दिए गए। जिसके बाद मकान निर्माण हो गए। अतिक्रमण से भुजलिया विसर्जन स्थल काफी सकरा हो गया। जिसके कारण भुजलिया विसर्जन स्थल तक पहुंचने में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़़ेगा। इस पर प्रशासन से अतिक्रमण हटाने की मांग की जा रही है।