जुन्नारदेव की ग्राम पंचायतों में टीडीएस कटौती में खेल
क्या कार्रवाई करेंगे जिला कलेक्टर? जुन्नारदेव की ग्राम पंचायतों में टीडीएस कटौती में खेल
संतोष आमरे। कॉर्न सिटी। जुन्नारदेव। जनपद पंचायत जुन्नारदेव के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों में वित्तीय अनियमितता और प्रशासनिक उदासीनता का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। पंचायत राज संचालनालय, भोपाल (मध्य प्रदेश) द्वारा जारी पत्र क्रमांक पं.रा./T/2025/18956 दिनांक 23/10/2025 के स्पष्ट और सख्त निर्देशों के बावजूद, पंचायतों द्वारा भुगतान के दौरान टीडीएस (TDS) की नियमानुसार कटौती नहीं की जा रही है।
पंजीयन की औपचारिकता पूरी, पर अमल नगण्य
संचालनालय के आदेशों के पालन में जुन्नारदेव की ग्राम पंचायतों का टीडीएस डिडक्टर (TDS Deductor) के रूप में विधिवत पंजीयन भी कराया जा चुका है। पंजीयन होने का अर्थ है कि पंचायतें इस नियम और अपनी जिम्मेदारी से भली-भांति अवगत हैं, इसके बावजूद जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है:
* नाममात्र की कटौती: जनपद की दर्जनों पंचायतों में से केवल ‘हाथों की उंगलियों पर गिनी जा सकने वाली’ कुछ ही पंचायतें टीडीएस काट रही हैं।
* पंजीयन सिर्फ कागजों तक सीमित: पंचायतों ने पंजीयन की प्रक्रिया तो पूरी कर ली, लेकिन वेंडरों और ठेकेदारों को भुगतान करते समय टैक्स काटने में जानबूझकर कोताही बरती जा रही है।
* सीधा भुगतान: अधिकांश पंचायतों में बिना किसी कटौती के पूरा भुगतान किया जा रहा है, जिससे सरकारी खजाने को मिलने वाले राजस्व की चोरी हो रही है।
क्यों जरूरी है टीडीएस? जानें इसके फायदे
नियमानुसार टीडीएस काटना न केवल कानूनी बाध्यता है, बल्कि इसके कई महत्वपूर्ण लाभ भी हैं:
* राजस्व में वृद्धि: टीडीएस के माध्यम से सरकार को नियमित कर प्राप्त होता है, जिससे विकास कार्यों के लिए धन उपलब्ध रहता है।
* पारदर्शिता: टीडीएस कटने से यह रिकॉर्ड में रहता है कि किस फर्म को कितना भुगतान हुआ, जिससे भ्रष्टाचार और फर्जी बिलिंग पर रोक लगती है।
* कर चोरी पर लगाम: पंचायत स्तर पर टैक्स कटने से संबंधित वेंडर के लिए अपनी आय छुपाना नामुमकिन हो जाता है।
* जुर्माने से बचाव: समय पर टीडीएस काटने से पंचायतों पर आयकर विभाग द्वारा लगाए जाने वाले भारी जुर्माने का खतरा टल जाता है।
जिम्मेदारों की उदासीनता पर सवाल
संचालनालय के पत्र क्रमांक 18956 के माध्यम से स्पष्ट निर्देश थे कि कोई भी भुगतान बिना टीडीएस कटौती के न किया जाए। इसके बावजूद पंजीयन होने के बाद भी कटौती न करना सीधे तौर पर वरिष्ठ कार्यालय के आदेशों की अवहेलना है। स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की चुप्पी के कारण पंचायतों में वित्तीय अनुशासन पूरी तरह चरमरा गया है।
* निगरानी का अभाव: जब पंचायतों का पंजीयन हो चुका है, तो जनपद स्तर के जिम्मेदार अधिकारी उनके रिटर्न और कटौती की जांच क्यों नहीं कर रहे?
* कार्रवाई का अभाव: जानबूझकर नियमों की अनदेखी करने वाले सचिवों पर अब तक कोई कठोर दंडात्मक कार्रवाई नहीं होना, मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग
क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने जिला कलेक्टर और मुख्य कार्यपालन अधिकारी (जिला पंचायत) से इस गंभीर वित्तीय चूक पर तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। यदि समय रहते ऑडिट कर टीडीएस की वसूली सुनिश्चित नहीं की गई, तो भविष्य में आयकर विभाग द्वारा पंचायतों पर लगने वाली भारी पेनाल्टी का बोझ अंततः शासन पर ही पड़ेगा।
