अधिकारी ने कंकाल को बताया ‘मवेशी’, मामले को रफा-दफा करने की साजिश!
बिना सैंपल और फॉरेंसिक रिपोर्ट के ही अधिकारी ने कंकाल को बताया ‘मवेशी’, मामले को रफा-दफा करने की साजिश!
पेंच नेशनल पार्क के बफर जोन में मिला संदिग्ध कंकाल, मामले को दबाने में जुटा वन विभाग! उच्च स्तरीय जांच की मांग
Corn city बिछुआ। पेंच नेशनल पार्क के बफर जोन अंतर्गत बंधान बीट के थोटामाल के घने जंगलों में एक जले हुए कंकाल के मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। सोमवार सुबह जैसे ही ग्रामीणों ने जंगल के बीच राख और हड्डियों के अवशेष देखे, विभाग में हड़कंप मच गया। इस गंभीर मामले में वन विभाग की घोर लापरवाही और रहस्यमयी चुप्पी के बाद अब स्थानीय ग्रामीणों ने उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
तेंदूपत्ता तोड़ने गए ग्रामीणों ने देखा खौफनाक मंजर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह स्थानीय ग्रामीण बंधान बीट के सिंगारदीप सर्किल जंगल में तेंदूपत्ता तोड़ने गए थे। इसी दौरान उन्हें जंगल के बीचों-बीच एक जगह भारी मात्रा में राख और जले हुए हड्डियों के अवशेष दिखाई दिए। ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना डिप्टी रेंजर और स्थानीय वनरक्षक को दी। सूचना मिलते ही दोनों कर्मचारी मौके पर पहुंचे और वरिष्ठ अधिकारियों को मामले से अवगत कराया।
बिना जांच के ‘मवेशी’ घोषित करने पर उठे गंभीर सवाल
मंगलवार को वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि मौके पर न तो कोई आधिकारिक पंचनामा तैयार किया गया और न ही साक्ष्य के तौर पर फोटोग्राफ्स लिए गए। सबसे बड़ा सवाल वन विभाग के उस दावे पर उठ रहा है जिसमें वे बिना किसी जांच के इसे मवेशी बता रहे हैं।
बिना सैंपल और रिपोर्ट के दावा कैसे?- नियम के मुताबिक किसी भी संदिग्ध अवशेष का सैंपल लेकर फॉरेंसिक लैब या वेटरनरी एक्सपर्ट के पास भेजा जाता है। लेकिन वन विभाग के अधिकारियों ने बिना किसी रिपोर्ट के ही इसे मवेशी घोषित कर दिया, जो सीधे तौर पर मामले को रफा-दफा करने की साजिश की ओर इशारा करता है।
घने जंगल में कैसे पहुंचा मवेशी?- मुख्य सड़क से लगभग दो किलोमीटर दूर, पहाड़ी, पथरीले रास्ते और हिंसक वन्यजीवों से भरे इस घने जंगल के बीच कोई मवेशी जा सकता है? और अगर उसे वहां जलाया गया, तो जलाने वाले कौन थे? इन सवालों का जवाब देने से विभाग कतरा रहा है।
इस घटना ने वन विभाग की कार्य प्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं
मुख्य सड़क से लगभग दो किलोमीटर दूर, पहाड़ी और पथरीले रास्ते से होते हुए इस घने जंगल के बीच कोई मवेशी जलाने कैसे पहुंच सकता है?
अगर किसी वन्यजीव का शिकार कर उसे जलाया गया है, तो डॉग स्क्वाड और फॉरेंसिक टीम को तुरंत क्यों नहीं बुलाया गया?
घटना के दूसरे दिन मंगलवार को पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम तो मौके पर पहुंची, लेकिन विभाग के पास न तो कोई आधिकारिक पंचनामा था और न ही उस समय घटना स्थल के फोटोग्राफ्स।
वन विभाग के अधिकारी द्वार बताए जा रहा है की दिसंबर माह में मवेशी को जलाया गया था सवाल यह उठता है की 6 माह होने के बाद और बीच में बारिश और हवा तूफान आने बाद भी राख की स्थिति जस तस है ।
गुमराह करने की कोशिश और पत्रकारों से दूरी
मंगलवार को जब मीडिया कर्मियों ने इस पूरे मामले की सच्चाई जाननी चाही, तो वन विभाग के रेंजर, डिप्टी रेंजर और वनरक्षक सभी ने इस मामले से पल्ला झाड़ लिया। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग के अधिकारी उन्हें गुमराह कर रहे हैं। कोई इसे गाय की हड्डी बता रहा है, तो कोई इसे चीतल का अवशेष कहकर मामले को रफा-दफा करने में जुटा है।जब पत्रकारों ने रेंज अधिकारी और डिप्टी रेंजर से उनके कार्यालय और मोबाइल फोन पर संपर्क करने की कोशिश की, तो उनके फोन बंद मिले और वे कार्यालय से भी नदारद रहे। शाम तक विभाग की ओर से कोई भी आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया, जिससे साफ झलकता है कि मामले को दबाने का पूर्ण प्रयास किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने की उच्च स्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग
वन विभाग के अधिकारी इस टाल मटोल वाले रवैए से स्थानीय जनता में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि इस घने जंगल में या तो किसी संरक्षित वन्यजीव का अवैध शिकार कर साक्ष्य मिटाने के लिए उसे जलाया गया है, या फिर यह मामला किसी अन्य गंभीर अपराध से जुड़ा हो सकता है। स्थानीय निवासियों ने पेंच नेशनल पार्क के उच्च अधिकारियों और जिला कलेक्टर से मांग की है कि इस पूरे मामले की किसी स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जाए और लापरवाही बरतने व मामले को छुपाने वाले दोषी वन अधिकारियों और कर्मचारियों पर तत्काल कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
