सरपंच और सचिव ही डकार रहे ‘लाडली बहनो’ का हक, अपात्रों को मिल रहा सरकारी लाभ
जुन्नारदेव जनपद में नियमों की धज्जियाँ: बाकोडी के सरपंच और सचिव ही डकार रहे ‘लाडली बहनो’ का हक, अपात्रों को मिल रहा सरकारी लाभ
Corn city । santosh amare।जुन्नारदेव।प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना’ को लेकर जुन्नारदेव जनपद के ग्राम पंचायत बाकोडी से एक बेहद गंभीर और नियम विरुद्ध मामला सामने आया है। जहाँ गरीब और जरूरतमंद महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने वाली इस योजना का लाभ, खुद नियमों को ताक पर रखकर रसूखदार जनप्रतिनिधि और शासकीय कर्मचारी उठा रहे हैं।
शासन के स्पष्ट और कड़े निर्देश हैं कि कोई भी शासकीय कर्मचारी, अधिकारी या ग्राम पंचायतों में उपसरपंच और पंचों को छोड़कर अन्य कोई भी जनप्रतिनिधि (जैसे सरपंच) इस योजना का लाभ लेने के लिए सर्वथा अपात्र हैं।
क्या है लाडली बहना योजना के नियम
मध्यप्रदेश शासन महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, वल्लभ भवन, भोपाल (म.प्र.)भोपाल के द्वारा जारी आदेश क्रमांक क्रमांक 581/1134838/2023/50-2 दिनांक 01.03.2023 के बिंदु क्रमांक 4. योजना अंतर्गत अपात्रता – योजना के अंतर्गत ऐसी महिलाऐं अपात्र होंगी के बिंदु क्रमांक -4.7 जिनके परिवार का कोई सदस्य स्थानीय निकायों में निर्वाचित जनप्रतिनिधि (पंच एवं उपसरपंच को छोडकर) हो। उक्त आदेश से स्पष्ठ हो जाता है कि ग्राम पंचायत के सरपंच जो की निर्वाचित जन प्रतिनिधियो की श्रेणी में आते है व सरपंच के परिवार के सदस्य इस योजना का लाभ नही ले सकते इसके बावजूद जुन्नारदेव जनपद के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बाकोडी में नियमों को सरेआम ठेंगा दिखाया जा रहा है।
सचिव की पत्नी और खुद सरपंच ले रहे योजना का लाभ
मिली जानकारी के अनुसार, बाकोडी पंचायत के सचिव बरातीलाल लोबो की पत्नी होलिका बाई लोबो द्वारा वर्तमान समय तक पूरी तरह नियमविरुद्ध तरीके से लाडली बहना योजना की राशि प्राप्त की जा रही है। एक शासकीय कर्मचारी की पत्नी होने के नाते वे इस योजना के दायरे में कहीं भी नहीं आतीं।
हद तो तब हो जाती है जब पंचायत की मुखिया यानी बाकोडी सरपंच बिलसो शीलू द्वारा भी इस योजना का गलत तरीके से लाभ उठाया जा रहा है। जिन कंधों पर योजना का सही क्रियान्वयन कराने और पात्र महिलाओं को लाभ दिलाने की जिम्मेदारी है, वही जिम्मेदार खुद अपात्र होते हुए भी सरकारी खजाने पर डाका डाल रहे हैं।
जनपद में बड़े घोटाले की आशंका, वसूली की मांग तेज
यह मामला सिर्फ एक पंचायत तक सीमित नहीं है। सूत्रों की मानें तो जुन्नारदेव जनपद की कई अन्य ग्राम पंचायतों में भी बड़े पैमाने पर यही खेल चल रहा है। कई सरपंच, सचिव और रोजगार सहायकों के परिवारों द्वारा सांठगांठ कर गलत तरीके से इस योजना का लाभ लिया जा रहा है, जिससे वास्तविक जरूरतमंद महिलाएं आज भी कतार में खड़ी हैं।
अब इस पूरे मामले में ग्रामीणों और सजग नागरिकों द्वारा उच्च स्तरीय जांच की मांग की जा रही है। मांग है कि:
• बाकोडी सरपंच और सचिव की पत्नी से अब तक ली गई पूरी राशि की कड़ाई से वसूली की जाए।
• नियमों का उल्लंघन करने वाले अन्य सभी सचिव और सरपंच के खिलाफ दंडात्मक व प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।
• जुन्नारदेव जनपद के ओर भी ऐसे सभी सरपंच, सचिव और रोजगार सहायकों के परिवारों की विस्तृत जांच हो ताकि अपात्रों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सके।
बड़ा सवाल: जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और नियम बनाने व लागू करने वाले ही सरकारी योजनाओं का अनुचित लाभ उठाने लगें, तो क्षेत्र के गरीब आदिवासियों और वास्तविक हकदारों को न्याय कैसे मिलेगा? अब देखना यह है कि जनपद और जिला प्रशासन ओर जिले।के संवेदनशील कलेक्टर इस खुली अनियमितता पर क्या कड़ा रुख अपनाते है।
