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May 20, 2026
आबकारी नियमों की उड़ी धज्जियां: गांव-गांव परोसी जा रही अवैध शराब
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आबकारी नियमों की उड़ी धज्जियां: गांव-गांव परोसी जा रही अवैध शराब

May 19, 2026

जुन्नारदेव में आबकारी नियमों की उड़ी धज्जियां: गांव-गांव परोसी जा रही अवैध शराब, बिना रेट लिस्ट के मर्जी के दामों पर बिक्री

Corn city /santosh amare (छिंदवाड़ा)जुन्नारदेव क्षेत्र में इन दिनों शराब ठेकेदार की मनमानी और आबकारी विभाग की रहस्यमयी चुप्पी चर्चा का विषय बनी हुई है। शासन के कड़े नियमों को ताक पर रखकर क्षेत्र में खुलेआम अवैध गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है, जिससे न केवल राजस्व को चूना लग रहा है बल्कि स्थानीय कानून व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

प्रमुख बिंदु: सुर्ख़ियों में ठेकेदार की मनमानी

गांव-गांव अवैध सप्लाई का जाल:

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मुख्य शराब दुकानों से अवैध रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में शराब की खेप पहुंचाई जा रही है। जुन्नारदेव के आस-पास के गांवों में अवैध ‘पैकारी’ (अवैध बिक्री केंद्र) धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं, जिससे ग्रामीण अंचलों का माहौल पूरी तरह खराब हो चुका है।

बिना रेट लिस्ट के मनमाने दाम:

नियमत: हर लाइसेंसी दुकान के सामने शासन द्वारा तय रेट लिस्ट (मूल्य सूची) टंगी होनी अनिवार्य है। लेकिन जुन्नारदेव क्षेत्र की दुकानों से रेट लिस्ट गायब है। ठेकेदार के कारिंदे ग्राहकों से मनमर्जी के दाम वसूल रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं का आर्थिक शोषण हो रहा है।

खुलेआम चल रहे अवैध अहाते:

नियमों के मुताबिक बिना वैध अनुमति के अहाता (बैठकर पीने की व्यवस्था) संचालित नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद, नियमों को ठेंगा दिखाते हुए खुलेआम दुकानों के आस-पास अवैध रूप से लोगों को बैठाकर शराब परोसी जा रही है, जिससे देर शाम होते ही आम राहगीरों और महिलाओं का निकलना दूभर हो जाता है।

आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

“आखिरकार स्थानीय प्रशासन और आबकारी विभाग इस बड़ी लापरवाही से बेखबर क्यों है? क्या अधिकारियों को ग्रामीण क्षेत्रों में फैल रहे इस अवैध नेटवर्क की भनक नहीं है, या फिर जानबूझकर इस ओर से आंखें मूंद ली गई हैं?”

ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, जिससे ठेकेदार के हौसले बुलंद हैं।

आगे क्या?

अगर समय रहते इस अवैध सप्लाई और बिना रेट लिस्ट की मनमानी पर लगाम नहीं लगाई गई, तो आने वाले दिनों में क्षेत्र की जनता उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी। अब देखना यह है कि खबर प्रकाशित होने के बाद जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद से जागते हैं या ठेकेदार की यह ‘सुर्खियां’ यूं ही बदस्तूर जारी रहेंगी।