100 वर्षों से संघ कर रहा है हिन्दू समाज को संगठित: डॉ. पूर्णेन्दु सक्सेना
पंच परिवर्तन से होगा समाज का कायाकल्प: डॉ. पूर्णेन्दु सक्सेना
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ महाकौशल प्रांत का संघ शिक्षा वर्ग छिंदवाड़ा में सम्पन्न
Corn city छिंदवाड़ा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, महाकौशल प्रांत द्वारा आयोजित संघ शिक्षा वर्ग सामान्य (विद्यार्थी एवं व्यवसायी) का आज शिव पर्वत, बड़गोना लिंगा, छिंदवाड़ा में सफलतापूर्वक समापन हुआ।
इस अवसर पर आयोजित दीक्षांत समारोह में मंच पर मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. महेंद्र सिंह जी, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, छिंदवाड़ा तथा प्रसिद्ध व्यवसायी एवं उद्योगपति श्री संजीव कुमार पाटनी “गुल्लू भैया” उपस्थित रहे।
इसके साथ ही विद्यार्थी वर्ग के सर्वाधिकारी श्री अरुण जी सैयाम, व्यवसायी वर्ग के सर्वाधिकारी श्री मनोज जी जैन, विभाग संघचालक छिंदवाड़ा श्री भजनलाल जी चौपड़े तथा कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं माननीय क्षेत्र संघचालक, मध्य क्षेत्र (मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़) डॉ. पूर्णेन्दु जी सक्सेनाबमंच पर विराजमान रहे।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री संजीव कुमार पाटनी जी ने कहा मै बचपन से सोच रहा था कि संघ में प्रवेश करूं किंतु मैं तन से नहीं जुड़ पाया, मन से जुड़ा। चुनौतियां हमेशा आएंगी और रहेंगी किंतु ऐसी कठोर साधना से समाप्त भी हो जाएंगी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डॉ महेन्द्र सिंह जी ने कहा कि जिस प्रकार सभी मानव शरीर का स्वस्थ होना आवश्यक है उसी प्रकार प्रत्येक नागरिक के अंदर देश भक्ति का भाव जाग्रत होना चाहिए।
आगे उन्होंने कहा सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है। भारत ने पूरे विश्व को योग और आयुर्वेद दिया है। यह प्रशिक्षण कुछ दिनों के लिए नहीं बल्कि जीवन भर राष्ट्र निर्माण के लिए प्रयत्नशील रहना चाहिए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए क्षेत्र संघचालक डॉ. पूर्णेन्दु सक्सेना ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पिछले 100 वर्षों से शांत मन से हिन्दू समाज को संगठित करने का कार्य करता आ रहा है। समाज परिवर्तन के लिए प्रत्येक नागरिक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने पंच परिवर्तन का आह्वान करते हुए कहा कि ये पाँच सूत्र सभी सामाजिक संस्थाओं में आने चाहिए —
– कुटुंब व्यवस्था का पालन हो। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का परिवार सभी के लिए आदर्श है।
– स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करें और स्वभाषा का व्यवहार करें।
– प्रकृति पूजन भारतीय संस्कृति की प्राथमिकता है — पशु-पक्षी से लेकर पेड़-पौधों तक सबका ध्यान रखें।
– संविधान का पालन करें। नागरिक कर्तव्यों का निर्वहन अनिवार्य रूप से हो।
– सामाजिक समरसता — हर घर का कोई न कोई मित्र अवश्य हो।
महिला सम्मान और धर्मांतरण पर बोले संघचालक
डॉ. सक्सेना ने कहा कि महिलाओं का सम्मान परिवार से ही प्रारंभ होता है और धर्मांतरण को भी पारिवारिक संस्कारों के माध्यम से ही रोका जा सकता है। लव जिहाद जैसे संवेदनशील विषयों पर समाज को सजग रहने की आवश्यकता है।
पर्यावरण और भ्रष्टाचार मुक्त भारत
उन्होंने कहा कि पानी बचाना, पेड़ लगाना और प्लास्टिक मुक्त समाज बनाना हमारा परम दायित्व है। भ्रष्टाचार मुक्त भारत की शुरुआत भी अपने परिवार से ही करनी होगी।
मंदिर बनें समाज परिवर्तन के केंद्र
संघचालक ने आग्रह किया कि मंदिर समाज परिवर्तन के केंद्र बनें। जन्मदिन मंदिरों में मनाए जाएं। सामाजिक कार्यक्रमों का प्रारंभ जन गण मन से और समापन वंदे मातरम्/राष्ट्रगान से हो।
कालाराम मंदिर में आंबेडकर के वंशजों को मिला सम्मान
कार्यक्रम में उन्होंने एक महत्वपूर्ण घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि जिस नाशिक के कालाराम मंदिर में कभी डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर को प्रवेश से वंचित किया गया था, वहाँ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रयासों से मंदिर के पुजारियों ने आंबेडकर जी के वंशजों को सम्मानपूर्वक आमंत्रित कर प्रवेश दिलाया। उन्होंने स्पष्ट कहा — “मंदिर सभी के लिए होना चाहिए।”
छत्तीसगढ़ में कबीर पंथी गुरुजी की पहल — 30 परिवारों को मिल रहा संस्कार प्रशिक्षण
डॉ. पूर्णेन्दु सक्सेना ने आगे बताया कि छत्तीसगढ़ के दामाखेड़ा में एक प्रेरणादायी उदाहरण सामने आया है, जहाँ वहाँ के कबीर पंथी गुरुजी ने स्वयं आगे आकर 30 परिवारों को प्रशिक्षण देना प्रारंभ किया है। यह इस बात का प्रमाण है कि समाज परिवर्तन की भावना अब धार्मिक और सामाजिक नेतृत्व के स्तर पर भी जागृत हो रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि अस्पृश्यता के कारण ही हम गुलाम हुए थे और यह गलती अब नहीं दोहरानी चाहिए। अंतर्जातीय विवाह के समायोजन पर भी समाज प्रमुखों को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
कार्यक्रम में इससे पूर्व वर्ग कार्यवाह श्री रुद्र प्रताप जी ने वर्ग का प्रतिवेदन उपस्थित जनों के समक्ष प्रस्तुत किया।
उन्होंने बताया कि इस पवित्र स्थल पर महाकौशल प्रांत के 34 जिलों से सामान्य विद्यार्थी वर्ग में 317 तथा सामान्य व्यवसायी वर्ग में 203 शिक्षार्थियों ने भाग लिया। सभी शिक्षार्थियों ने अपने स्वयं के खर्च पर, बिना मोबाइल के, प्रतिदिन प्रातः 4 बजे से रात्रि 10:30 बजे तक अनथक साधना की।
वर्ग के सफल संचालन में 26 सदस्यों की संचालन टोली, 56 शिक्षक एवं 95 प्रबंधकों ने अथक परिश्रम किया। वर्ग में कुल 768 लोगों के 15 दिन रहने, प्रशिक्षण, औषधालय एवं भोजन की समुचित व्यवस्था की गई, जिनमें 520 शिक्षार्थी सम्मिलित रहे।
यह वर्ग 16 मई की सायं से 1 जून प्रातः तक आयोजित है। शिक्षार्थी 1 जून को दीक्षांत समारोह के उपरांत अपने-अपने घर लौटेंगे और अपने कार्यक्षेत्र में संघ के कार्य विस्तार को नई गति प्रदान करेंगे।
श्री रुद्र प्रताप जी ने समस्त स्वयंसेवकों से आग्रह किया कि आगामी कार्यक्रमों में प्रत्येक गाँव में संघ की शाखा लगे, इस दिशा में सभी मिलकर प्रयास करें।
कार्यक्रम में प्रांत प्रचारक श्री बृजकांत जी, सह प्रांत प्रचारक श्री श्रवण जी सैनी, प्रांत कार्यवाह श्री उत्तम बनर्जी जी, सह प्रांत कार्यवाह श्री अनिल चंद्रवंशी जी तथा प्रांत प्रचार प्रमुख श्री विनोद दिनेश्वर जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। इसके साथ ही छिंदवाड़ा जिले के गणमान्य नागरिक, माताएँ एवं भगिनियाँ भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं।
