नाले के पानी से 12 महीना प्यास बुझा रहे आदिवासी अंचल के लोग

Corn City News/छिंदवाड़ा

तामिया पातालकोट एक घुट पानी के लिए पातालकोट के आदिवासी प्रतिदिन संघर्ष कर रहे हैं। पानी का प्रबंध करने में इनकी आंखों से आंसू निकलना आम बात हो गई है। पानी के लिए कई किलोमीटर तक पथराले रास्तों पर चलना पड़ता है। पैरों में छाले पड़ जाते हैं। घंटों संघर्ष करने के बाद एक मटका पानी नसीब होता नाले में जमा पानी से पेयजल समेत सभी जरूरतें पूरी करते हैं। जल संकट की ऐसी स्थिति प्रतिवर्ष निर्मित होती है। बूंद-बूद पानी के लिए मशक्कत करनी पड़ती है।पतालकोट की ग्राम पंचायत रातेड़ के आश्रित ग्राम तालाबढाना में भीषण जल संकट है। यहां के निवासी 365 दिन नाले के पानी का उपयोग करते हैं।

तालाबढाना में 16 मकान है। यहां की जनसंख्या 95 हैं तालाबळाना के रहवासियों की सुबह पानी का इंतजाम करने से होती है। परिवार के सभी सदस्य पानी भरने के लिए एक किलोमीटर दूर नाले तक जाते हैं। वहां से पानी भरकर घर लाते हैं, फिर वनोपज बीनने जंगल चले जाते हैं।शाम को एक बार फिर परिवार के सदस्य उसी नाले से पानी का परिवहन करते हैं। वह नाला भी लगभग एक माह बाद सूख जाएगा फिर तीन किलोमीटर दूर स्थित दूसरे नाले से पानी का इंतजाम करना किया जाए।...*प्रीतम सिंह की रिपोर्ट*